तुम्हारा ब्लाग देखा. चूंकि वक्त कम था इसलिए उस पर विस्तारपरक दृष्टिपात नहीं कर पाया. शायद अगली बार उतना समय मिले पाएगा और तुम्हारे ब्लाग का पूरा मैटर पढ़ पाऊं. वैसे यकीन है कि तुम्हारे विचार का जितना अगोचर आयाम है उतना ही विस्तार क्षितिज लिए अपनी वैचारिक सामग्री तुमने ब्लाग पर हम जैसे ग्यान पिपासुओं के लिए उपलब्ध कराए होगे.
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तुम्हारा ब्लाग देखा. चूंकि वक्त कम था इसलिए उस पर विस्तारपरक दृष्टिपात नहीं कर पाया. शायद अगली बार उतना समय मिले पाएगा और तुम्हारे ब्लाग का पूरा मैटर पढ़ पाऊं. वैसे यकीन है कि तुम्हारे विचार का जितना अगोचर आयाम है उतना ही विस्तार क्षितिज लिए अपनी वैचारिक सामग्री तुमने ब्लाग पर हम जैसे ग्यान पिपासुओं के लिए उपलब्ध कराए होगे.
kuchh to likha koro ya phir dusare ka padha karo
kuch likho sir ji
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